गोवा में ईसाईयत के बर्बर इतिहास का एक काला पृष्ठ - वैदिक समाज जानकारी

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Friday, 20 December 2019

गोवा में ईसाईयत के बर्बर इतिहास का एक काला पृष्ठ

 गोवा में ईसाईयत के बर्बर इतिहास का एक काला पृष्ठ

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गोवा अपनी हरियाली, नयनरम्य समुद्र तट और उछलते-कूदते समुद्र की लहरों के लिए विश्वप्रसिद्ध है। गोवा के अपने समय के स्मारकों का एक लंबा व रोचक इतिहास हैं।

अपने रोमांचकारी अतीत और वर्तमान की आधुनिक शानदार गति के साथ, गोवा आज हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम है।

प्राचीन काल से भारत का एक प्रमुख व्यापार केंद्र होने के नाते, गोवा ने विश्वभर के विभिन्न तबके के लोगों के साथ साथ ईसाई मिशनरियो को भी आकर्षित किया।

पोर्च्युगीजों के काल में गोवा में इन ईसाई मिशनरियों का प्रभाव और प्रवृत्तियां चरमसीमा पर थे; गोवा और ईसाइयत एक दूसरे के पर्याय बन चुके थे।

यदि एक जिज्ञासु पर्यटक के रूप में आपको गोवा में घूमने के अवसर मिले है तो आपने अनुभव किया होगा कि गोवा में स्थान स्थान पर खड़े किये गए छोटे-बड़े नए-पुराने चर्च वहां पर इसाईमत की उपस्थिति बयां कर रहे है।

एक पर्यटक के रूप में आपने गोवा में स्थित "बेसिलिका ऑफ बोम जीसस" (Basilica of Bom Jesus) अवश्य देखा होगा। यह वही प्रसिद्ध चर्च है, जिसमें करीब 460 साल पुराने सड़े हुए एक कंकाल (dead body) को प्रदर्शनी के रूप में एक बक्से में रखा गया है, जो फ्रांसिस ज़ेवियर नामक ईसाई 'संत' (?) का है।

 यह कंकाल उस 'संत' (?) का है जिसने 16वीं शताब्दी में गॊवा में न्यायिक जांच की आड़ में हिन्दुऒं को प्रताड़ित करने में कोई कसर नही छोड़ी थी। बड़ी ही बेरहमी और बर्बरता से हिन्दुओं (जिसे ईसाईयत में heathens - हिथन्स कहा जाता है) को प्रताड़ित करने के कारण ही उसे 'संत' की उपाधी दी गयी है।

गॊवा में 16वीं शताब्दी में पॊर्चुगीसों का शासन चल रहा था। पुर्तगाल के राजा जॉन तृतीय तथा रोम स्थित तत्कालीन पोप की सहायता से फ्रांसिस ज़ेवियर को "जेसुइट मिशनरी" का मुखिया बनाकर 7 अप्रैल 1541 ई को भारत भेजा गया था। इस मिशनरी का एक ही मकसद था और वह था हिन्दुओं का धर्मांतरण करना/करवाना।

1541 ई. में जब फ्रांसिस जेवियर गॊवा आया तो उसने देखा की जिन हिन्दुओं ने ईसाई मत का स्वीकार किया था वे अभी भी अपने मातृ-धर्म के विधिविधानों का पालन कर रहे थे।

यूरॊप के चर्च की बिगुल की एक न सुन कर इसाई धर्म में परिवर्तित हुए हिन्दु छुप छुप कर अपने घरॊं में हिन्दू रीतिरिवाजों का पालन कर रहे थे।

जब फ्रांसिस को इस बात का पता चला की हिन्दू लोग इसाई मत में परिवर्तित होने के बाद भी अपने मूल धर्म का पालन कर रहे हैं तो वह कुपित हुआ और उसने एक बर्बर कार्य को अंजाम दिया। उसने यूरॊप के अपने राजा को खत लिखा और गॊवा में "न्यायिक जांच" करवाने की आज्ञा मांगी।

न्यायिक जांच (यानी इनक्विसिशन - inquisition) की आड़ में उसने हिन्दुओं को किस प्रकार प्रताड़ित किया था यह बहुत कम लोग जानते है। बड़ी विडम्बना है कि गॊवा के चर्च में रखे गये फ्रांसिस जेवियर के उस कंकाल के पवित्र दर्शन बड़ी श्रद्धा और भक्ति से वही ईसाई करता है

जिसके पूर्वजो का जबरन धर्मपरिवर्तन किया गया था और वह हिन्दू भी करता है जिसके धर्म का मूलोच्छेद करने वह यीशू का सैनिक बनकर भारत आया था!

 बिना इस तथ्य को जाने कि उसी फ्रांसिस जेवियर ने इनक्विजिशन के नाम पर किस प्रकार हिन्दुओं को निर्मम रूप से प्रताड़ित किया था।

इनक्विसिशन की वह जांच प्रक्रिया और आरोपियों के लिए दंड का स्वरूप बड़ा ही भयावह था। सॊच कर ही शरीर में कम्पन होने लगता है कि उस दौर में इनक्विसिशन के इस भयावह मंज़र से गुजरनेवालों की दशा कैसी रही होगी।

माना जाता है कि सत्रहवीं सदी के अंत तक गॊवा के ज्यादातर गैर-ईसाईयो का व्यवस्थित रूप से पूरी तरह से ईसाईयत में मतांतरण करवाया गया था।

कुछ लोग अपनी जान बचाकर भाग गये और कर्नाटक और केरल में जाकर बस गये। ज़ेवियर ने यह ऐलान किया था कि "हिन्दु दुनिया की सबसे अपवित्र जाति है; वे जूठे और मक्कार हैं, आदि आदि।"

अब ज़रा इनक्विजिशन के नाम पर हिन्दुओं को किस प्रकार प्रताड़ित करते थे देखिए। क्रूरता और बर्बरता से भरा ऐसा कठॊर दंड और वह भी इसलिए की हिन्दू अपने मूल धर्म का पालन कर रहा था!

मनुष्य मात्र की कल्पना से परे था वह दंड विधान, जो मानवाता को भी सर झुकाने को विवश कर देता है। भारत (गोवा) में इंकविजिशन की स्थापना करने में अहम भूमिका अदा करने वाले इस 'संत' के कंकाल को समय समय पर बड़ी निर्लज्जता से साथ जनता के दर्शन हेतु प्रदर्शित किया जाता है और उसका महोत्सव मनाया जाता है!!

गोवा में ईसाईयत के क्रूर इतिहास के एक काले अध्याय (इंकविजिशन के विवरण) को जानने के प्रस्तुत है दो अत्यन्त महत्वपूर्ण व प्रामाणिक पुस्तके:

(१) Goa Inquisition (A.K. Priolkar)

https://drive.google.com/file/d/1JiUwvM2Qm93j2Uxsdo-_OsruvsjDM7Tg/view?usp=drivesdk

(२) गोवा में ईसाई मिशनरियों द्वारा हिन्दुओं पर अत्याचार

https://drive.google.com/file/d/1MzWIcXRK4wSow07tBvFv4Sv2QCdlJ6tZ/view?usp=drivesdk

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