प्रातः उठ के जो प्रभु गुण गाएगा वो ही जग में अमर फल पाएगा - वैदिक समाज जानकारी

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Friday, 20 December 2019

प्रातः उठ के जो प्रभु गुण गाएगा वो ही जग में अमर फल पाएगा

 वैदिक भजन

प्रातः उठ के जो प्रभु गुण गाएगा

वो ही जग में अमर फल पाएगा २


चलें आँधियाँ हज़ार टूटे गमों के पहाड़ २
कोई अपनी जगह से न हिलाएगा
प्रातः उठके जो...

दुःख दर्द सभी मिट जाएं
पग चूमती रहें सफलताएं २
लिए मन में लगन हुआ धुन में मगन २
उस प्रभु की शरण में जो आएगा
प्रातः उठके जो...

ये दुनिया है किसने बनाई
कोई कारीगर देवे न दिखाई २
इसे पालता है कौन व संभालता है कौन २
सभी उल्झनों का भेद खुल जाएगा
प्रातः उठके जो...

तुम चाहो जो *पथिक* सुख पाना
कभी और किसी द्वार पे न जाना २
भरे प्रभु के भण्डार धुआँधार लगातार २
चहुं ओर से आनन्द बरसाएगा
प्रातः उठके जो... २

चलें आँधियाँ हज़ार टूटे गमों के पहाड़ २
कोई अपनी जगह से न हिलाएगा
प्रातः उठके जो... २

स्वर एवं रचना - *सत्यपाल पथिक* (वैदिक भजनोपदेशक)

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