वैदिक भजन
प्रातः उठ के जो प्रभु गुण गाएगा
वो ही जग में अमर फल पाएगा २
चलें आँधियाँ हज़ार टूटे गमों के पहाड़ २
कोई अपनी जगह से न हिलाएगा
प्रातः उठके जो...
दुःख दर्द सभी मिट जाएं
पग चूमती रहें सफलताएं २
लिए मन में लगन हुआ धुन में मगन २
उस प्रभु की शरण में जो आएगा
प्रातः उठके जो...
ये दुनिया है किसने बनाई
कोई कारीगर देवे न दिखाई २
इसे पालता है कौन व संभालता है कौन २
सभी उल्झनों का भेद खुल जाएगा
प्रातः उठके जो...
तुम चाहो जो *पथिक* सुख पाना
कभी और किसी द्वार पे न जाना २
भरे प्रभु के भण्डार धुआँधार लगातार २
चहुं ओर से आनन्द बरसाएगा
प्रातः उठके जो... २
चलें आँधियाँ हज़ार टूटे गमों के पहाड़ २
कोई अपनी जगह से न हिलाएगा
प्रातः उठके जो... २
स्वर एवं रचना - *सत्यपाल पथिक* (वैदिक भजनोपदेशक)
No comments:
Post a Comment